सपने

कुछ सपने बाँधे हैं इन आँखो से,
जिन्हे पूरा होते देखना हैं |
वो सपने जो बनते हैं छोटे छोटे लम्हो से ,
जिनका ज़िकर ज़ुबान से करना हैं |

वो पूछते हैं इन सपनो में क्या रखा हैं ,
जो इतना सवार के रखता हूँ ,
वो आँख वाले अंधो को क्या पता
की मेरे से ये ख्वाब हैं और इनसे मैं हूँ |

अगर ज़िंदगी की बेड़िया तोड़ने की हिम्मत रखते ,
तो देख पाते ख्वाब मेरे क्या हैं ,
जो मेरी आँखों मे कुण्डी डाले
हमेशा से उनमे आज़ादी से जीते हैं |

याद है तुम्हे वो पल ?
जब तुमने खुल के जीया था
वो जब बिन सोचे क्या हो कल
तुमने ज़िंदगी मे उमँगो को झोका था ?

पर मैं तुम नहीं ,
मुझमें हिम्मत हैं ख्वाबो को बचाने का
जिनकी कीमत शायद बहुत हैं,
खुशी का इनाम मुझें मिलेगा ये ख्वाब पूरा करने का |

बहुत कम मिलती हैं ऐसी आँखे जनाब,
जो बाँधे रखती है सपने
और फिर भी सपने उड़ते है बे हिसाब
चलो मैं चला उन्हे उड़ते देखने
तुम उन्हे शायद नहीं देख पाओगे,
क्योंकि तुम्हारी तरह मैने
इनको किस्मत का बँधी नहीं बनाया हैं |